Short Radha Krishna Love Story in Hindi to Read -राधा कृष्‍ण की प्रेम कहानी


भगवान राधा कृष्‍ण की प्रेम कहानी -Short Radha Krishna Love Story in Hindi to Read

radha krishna pic
radha krishna love pic

इस पृथ्वी पर जब भी कोई मनुष्य भगवान श्री कृष्ण राधा को याद करता है या उनका नाम लेता है तो कोई भी मनुष्य पृथ्वी पर राधा और श्रीकृष्ण नहीं कहते बल्कि उनका नाम एक साथ ही राधा-कृष्ण पुकार या बोला जाता है और यह दोनों अलग-अलग नहीं है बल्कि  एक माने जाते हैं

krishna and radha love
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क्योंकि इनका प्यार ऐसा था कि दो शरीर और एक आत्मा जब जो पीड़ा राधा को होती है तो उसका परिणाम श्रीकृष्ण को भी अनुभव होता है जब श्री कृष्ण एक बार राधा का रूप धारण करते हैं तो तब राधा का मुंह गर्म दूध से जल जाता है तो श्रीकृष्ण के मुंह में फफोले आ जाते हैं ऐसी ही एक घटना जिसको पढ़ने के बाद आप यह जान पाएंगे कि राधा और कृष्ण के बीच यह कैसा अद्भुत प्रेम है।

radha and krishna relationship
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जब नारद ने तीनों लोकों में राधा नाम की स्तुति सुनी तो तब एक बार देवऋषि  नारद चिंतित हो गईं और स्वयं ही वो श्री कृष्ण से कितना प्रेम करते थे और अपनी इस समस्या के समाधान को हल कराने के लिए वे श्रीकृष्ण के पास उनके स्थान पर जा पहुंचे तो उन्होंने वहां जाकर देखा कि श्री कृष्ण सिर दर्द के कारण करहा रहे थे तब नारद ने उनसे तुरंत पूछा भगवान क्या आपकी इस पीड़ा का कोई उपचार नहीं है

krishna and radha photos
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तो नारद की यह बात सुनकर श्रीकृष्ण बोले कि यदि मेरा कोई भक्त अपनी चरणोदक पिला दे तो यह वेदना शांत हो सकती है तो श्री कृष्ण बोले कि यदि रुक्मणी अपने चरणोंदक पिला दे तो शायद लाभ हो सकता है  प्रभु के वचन सुनकर नारद रुकमणी के पास जा पहुंचे और उन्हें सारी बात बताई पर रुकमणी यह बात सुनकर बोली के नहीं नाराज जी मैं यह घोर पाप नहीं कर सकती हूं।

lord krishna and radha
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तो नारद ने लौटकर रुकमणी की अहसमति कृष्ण के सामने व्यक्त कर दी तब कृष्ण ने उन्हें राधा के पास भेज दिया नारद जी ने वहां जाकर सारी घटना प्रकट की और जब राधा को इस बात का पता चला तब राधा ने तुरंत एक पात्र में जल लाकर उसमें अपने पैर दबा दिए और नारद से बोली देव ऋषि इसे तत्काल कृष्ण के पास ले जाएं तब नारद जीराधा के इस व्यवहार को देखकर सोच में पड़ गए और तभी राधा बोली के मैं जानती हूं।

radha photos
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इससे मुझे घोर नरक मिलेगा किंतु अपने प्रियतम श्री  कृष्ण के सुख के लिए मैं यह यातना भोगने को तैयार हूं तब राधा की यह प्रेम पूर्वक बात सुनकर देव ऋषि नारद समझ गए कि तीनों लोकों में राधा के प्रेम की स्तुति क्यों हो रही है प्रस्तुत प्रशांत में राधा ने अपने स्वार्थहीन  प्रेम का परिचय दिया है यही है सच्चे प्रेम की पराकाष्ठा जो लाभ हानि की गणना नहीं करता है।

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